*छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026* को छत्तीसगढ़ सरकार की मंजूरी के बाद अब विधानसभा में पारित होने पर राज्य में धर्मांतरण पर प्रभावी कार्यवाही एवं नियंत्रण सुनिश्चित है, यह बात कहते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग लीगल सेल के प्रदेश अध्यक्ष एवं उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने कहा कि यह सरकार का सकारात्मक और सार्थक पहल होने के साथ स्वागतेय है, चूंकि छत्तीसगढ़ मंत्री परिषद ने 11 मार्च 2026 को *छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026* को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य प्रलोभन, बल या कपटपूर्ण तरीके से होने वाले अवैध धर्मांतरण को रोकना है।
विदित हो कि इस अधिनियम में सामूहिक अथवा डिजिटल धर्मांतरण पर कड़ी सजा का प्रावधान है तथा धर्म परिवर्तन से पहले जिला मजिस्ट्रेट को पूर्व सूचना अनिवार्य है और इसके उल्लंघन पर 20 साल तक की जेल हो सकती है
*छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026* के अनुसार प्रलोभन, दबाव, विवाह या डिजिटल तरीकों से धोखे से धर्म परिवर्तन कराना प्रतिबंधित है परन्तु स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट को 60 दिन पहले सूचित करना आवश्यक है । इसमें कड़ी सजा का प्रावधान करते हुए अवैध धर्मांतरण को संज्ञेय (Cognizable) और अजमानतीय (Non-bailable) अपराध बनाया गया है, जिसमें 20 साल तक की जेल हो सकती है, तो वहीं सामूहिक धर्मांतरण को विशेष रूप से प्रतिबंधित किया गया है। यह कानून छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रहे धर्मांतरण पर प्रभावी नियंत्रण लाने हेतु 1968 के पुराने कानून को और अधिक सख्त बनाने के लिए लाया जा रहा है।
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