जिला-कोरबा कलेक्टर (छत्तीसगढ़ )
जिला खाद्य अधिकारी घनश्याम कंवर जी की लापरवाही के कारण कोरबा जिले की पीडीएस प्रणाली पूरी तरह से ध्वस्त हो जाने की शिकायत बाबत
कोरबा जिले में देश की सबसे बड़ी योजना खाद्य सुरक्षा योजना पूरी तरह से नाकाम हो गई है, जिले का आलम या हो गया है, कि कई पीडीएस दुकानों में कई माह से ना तो खाद्यान्न गया है, और ना ही बांटा गया है, जिले की 50% से अधिक दुकानें भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ गई हैं, कई दुकानों में तो भ्रष्टाचार इस तरह फैल गया है, कि कई महीनो तक फर्जी तरीके से हितग्राहियों से फिंगरप्रिंट ई पोस मशीनों में ले लिया गया, लेकिन उन्हें राशन नहीं दिया गया शासन के तमाम आदेश, निर्देश आपके कार्यालय के आदेश , निर्देश के बावजूद जिला खाद्य अधिकारी पूरे जिले में चावल उत्सव नहीं बनवा सका, पीडीएस सिस्टम पूरी तरह से चर मरा गया है, यदि कोई आपात स्थिति वर्तमान में कोरोना जैसे बन जाए, तो कई हितग्राही भूख से प्राण त्यागने पर मजबूर हो जाएंगे, जिले में बफर स्टॉक का भी ध्यान नहीं रखा गया, जबकि प्रत्येक सप्ताह अधिकारियों की सामूहिक बैठक होती है, लेकिन उन बैठकों में भी आवश्यक वस्तुओं की कोई चर्चा संभवत: नहीं हुई, जिला खाद्य अधिकारी कभी भी निरंतर पीडीएस दुकानों में नहीं जाता, उल्टा करतला ब्लॉक के खाद्य निरीक्षक पारन सोलंकी जी को अपने ऑफिस में बैठ कर बाबू का कार्य करवा रहा है, जबकि करतला ब्लॉक की लगभग 60% दुकान भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ गई है, खाद्य निरीक्षक सोलंकी दुकानों में निरीक्षण के लिए नहीं जाता, दिन भर घनश्याम कंवर जी के आगे पीछे दौड़ते रहता है, खाद्य अधिकारी मिलरो के दबाव में कार्य कर रहा है, ऐसा प्रतीत होता है, सैकड़ो की संख्या से अधिक मिले कोरबा जिले में कस्टम मिलिंग के लिए अनुबंधित की गई है,उसके बावजूद गोदाम में पीडीएस दुकानों में भंडारण के लिए चावल की पूर्ति नहीं हो पा रही हैं, इसका एकमात्र कारण जिला खाद्य अधिकारी है, जिला खाद्य अधिकारी मिलरो से मोटी रकम घुस के रूप में ले लिया है, ऐसा प्रतीत होता है,क्योंकि कुछ दिन पहले जब खरीफ विपणन वर्ष 2025- 26 की धान खरीदी हो रही थी, उसी समय मिलो का सत्यापन खाद्य विभाग के द्वारा फर्जी तरीके से कराया गया, क्योंकि कई मिलो के सत्यापन के बाद जब गठित टीम के द्वारा मिलो का निरीक्षण किया गया तो कई हजार बोरी धान कम पाया गया, मिलो में ताले लगा दिए गए, सील कर दिया गया, लेकिन आज पर्यंत किसी भी मिलर पर संभवत: FIR नहीं हो सकी है, जबकि पड़ोसी जिले में इसी तरह के कंडीशन में मिलरो पर FIR किया गया है, जेल भेजा गया है, लेकिन जिला खाद्य अधिकारी पूरी तरह से भ्रष्टाचार में आकंठ डूब हुआ प्रतीत हो रहा है, शहर से लेकर ग्रामीण तक पूरी खाद्यान्न वितरण की व्यवस्था चरमरा गई है, पीडीएस दुकानों में अफरा – तफरी का माहौल निर्मित हो गया है, वह दिन दूर नहीं जब हितग्राही का सब्र टूट जाएगा,और ऐसे में दुकानों/ऑफिसो का घेराव भी होने की संभावना बनी हुई है, क्योंकि जिला खाद्य अधिकारी स्थिति को संभालने में पूरी तरह से नाकाम हो गया है, जिला खाद्य अधिकारी सरकार विरोधी कार्य कर रहा है, क्योंकि सरकार का उद्देश्य हितग्राही को समय पर खाद्यान्न देने की हैं, जिसे जिला खाद्य अधिकारी पूरी नहीं कर पा रहा है, जिसके कारण वर्तमान सरकार की छवि पूरी तरह से धूमिल हो रही है, सरकार के प्रति जनता के मन में आक्रोश पनप रहा है, सरकार की योजनाएं पूरी तरह से सफल नहीं हो पा रही है, खाद्य अधिकारी अपना चेंबर छोड़कर पीडीएस दुकानों का हाल देखने बिल्कुल भी नहीं जा रहे हैं,जबकि करोड़ों रुपए के शासकीय खाद्यान्न जिला खाद्य अधिकारी एवं उनके निचले स्तर के अधिकारियों के मिली भगत से शासकीय उचित मूल्य की दुकान से गायब हो गए हैं, शासकीय उचित मूल्य की दुकान से खाद्यान्न बिना जिला खाद्य अधिकारी या खाद्य निरीक्षक के मिली भगत से इतने बड़े पैमाने पर किसी भी कीमत पर गायब नहीं हो सकता है,यदि जिला खाद्य अधिकारी को जिले से हटाया नहीं गया तो आने वाले समय में सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा, जिले में हजारों हितग्राहियों के नाम राशन कार्ड से काट दिए गए हैं, उसमें से तो कई बुजुर्ग हो गए हैं, जिनके फिंगरप्रिंट मशीन एक्सेप्ट नहीं कर रही है,और उन्हें कई महीनो से राशन नहीं मिल रहा है, लेकिन भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा जिला खाद्य अधिकारी उसका कोई हल खोज नहीं पा रहा है, कई वृद्ध,विधवा, बेसहारा,निराश्रित महिलाएं पिछले कई माह से खाद्यान्न से वंचित हो गई है, लेकिन खाद्य विभाग पूरी तरह से लापरवाही करते हुए भ्रष्टाचारीर्यों का साथ दे रहा है, कई हितग्राहियों के तो खाद्यान्न लेप्स होने के कगार पर पहुंच गए हैं, पूरे जिले में हितग्राही इधर से उधर खाद्यान्न के लिए भटक रहे हैं, लगभग सारे दुकानों में ताले लगे हुए हैं, खाद्यान्न ना पहुंच पाने के कारण,, दुकानों में खाद्यान्न माइंस होने के कारण,,दुकान नहीं खुल रही है, लेकिन जिला खाद्य अधिकारी के कानों में जूं तक नहीं रेंग रहा है, ऐसे लापरवाह अधिकारियों की कोरबा में कोई जरूरत नहीं है, यदि पीडीएस व्यवस्था को एक सप्ताह के अंदर सुचारू रूप से चालू नहीं किया गया तो, मेरे द्वारा इसकी शिकायत मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन एवं खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मंत्रालय भारत सरकार से की जाएगी, और मुझे धरना प्रदर्शन करने के लिए भी मजबूर होना पड़ेगा,जिसकी सारी जवाबदारी जिला खाद्य अधिकारी श्री घनश्याम कंवर जी की होगी, महोदय से निवेदन है कि पीडीएस दुकानों में जितनी जल्द से जल्द हो सके खाद्यान्न का भंडारण कराया जाए, अन्यथा हितग्राही भूख से मारने लगेंगे, पूरे जिले में अफरा – तफरी का माहौल निर्मित हो गया है, लेकिन अधिकारी अपने चेंबर में बैठकर AC की हवा ले रहे हैं, उन्हें हितग्राहियों से कोई लेना-देना नहीं है ऐसा प्रतीत होता है,, ” शासन के करोड़ों रुपए के खाद्यान्न पीडीएस दुकानों से गायब हो गए हैं, अतः आपसे निवेदन है कि जांच करवा कर उक्त खाद्यान्न के कीमत की वसूली की जाए एवं खाद्य विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए उन्हें तत्काल सेवा से बर्खास्त किया जाए, केवल पीडीएस दुकानदारों पर कार्यवाही कर के पल्ला ना झाडा जाए, क्योंकि देश की सबसे बड़ी योजना खाद्य सुरक्षा योजना जो की आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत आता है, लोगों के जीवन मरण से जुड़ा हुआ है, और ऐसी योजनाओं का पलीता जिला खाद्य अधिकारी घनश्याम कंवर जी लगा रहे हैं, *मेरे इस पत्र की एक-एक प्रति मुख्य सचिव, खाद्य सचिव एवं खाद्य आयोग छत्तीसगढ़ शासन को भी भेजी जाए ताकि भ्रष्टाचार व लापरवाही करने वाले जिला खाद्य अधिकारी को यहां से हटाया जा सके,और योजना सुचारू रूप से चल सके, जब तक वर्तमान जिला खाद्य अधिकारी कोरबा जिले में रहेगा, तब तक देश की सबसे बड़ी योजना भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ती रहेगी, और सरकार पूरी तरह से बदनाम होती रहेगी, जिला खाद्य अधिकारी सरकार को बदनाम करने का बहुत बड़ा साजिश कोरबा जिले में रच रहा है, जिसका खामियाजा हितग्राहियों को भुगतना पड़ रहा है,
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