कोरबा जिले में हो रहे अवैध रेत के उत्खनन एवं परिवहन की जांच ACB एवं EOW से कराने की मांग लोक जनशक्ति पार्टी के कोरबा जिला अध्यक्ष राजकुमार दुबे ने कलेक्टर को दिए गए शिकायत पत्र में कहा कि जांच कर जिला खनिज अधिकारी के ऊपर FIR दर्ज करे, राजकुमार दुबे ने कहा कि
विगत कई सालों से कोरबा जिले के सीतामढ़ी, राताखार, बरमपुर, दर्री जो कि शहर से सटा हुआ इलाका है, उक्त इलाके में दिन रात अवैध उत्खनन कर रेत की कालाबजारी पूरे शहर में की जा रही है, दुबे ने अपने आवेदन में कहा कि जब शहर में इस तरह का अवैध रेत का उत्खनन एवं परिवहन चल रहा है, तो ग्रामीण इलाके का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है, स्थिति क्या होगी,आए दिन जहां एक ओर एक्सीडेंट हो रहा है, वही दूसरी तरफ खनिज विभाग के अधिकारी संभवत: अपने संरक्षण में अवैध रेत का उत्खनन करवाकर अपनी जेब भर रहे हैं, राजकुमार दुबे ने कहा कि जिला खनिज अधिकारी भ्रष्टाचार में आकंठ डूब गया है, दुबे ने कहा कि संभवत: ट्रैक्टर व टिप्पर वालों से मंथली कमीशन के रूप में उक्त अधिकारी व उसके निचले स्तर के अधिकारी घुस लेकर दिन रात रेत का अवैध उत्खनन व ट्रांसपोर्टिंग करवा रहे हैं, लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास कोरबा के जिलाध्यक्ष राजकुमार दुबे ने अपने आवेदन में एक विशेष बातें लिखी कि यदि कोरबा जिले के कुछ नदी नालों से हुए अवैध उत्खनन का मेजरमेंट लिया जाए, तो करोड़ों घन फिट रेत की खुदाई कर खुले बाजार में बेच दिया गया है, जिसकी यदि रॉयल्टी की बात की जाए तो सरकार को कई लाख रुपए के राजस्व की हानि हुई है,जिसका यदि मुख्य जिम्मेदार की बात की जाए तो जिला का खनिज अधिकारी ही है, उक्त जिला खनिज अधिकारी के ऊपर एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए, और सरकार को जितने राजस्व की हानि हुई है, उक्त अधिकारी के पेमेंट से काटकर सरकार के खाते में जमा करवानी चाहिए, क्योंकि जिला खनिज अधिकारी पूरी तरह से अवैध रेत उत्खनन व परिवहन अपने संरक्षण में करवा रहा है, दुबे ने कहा कि कलेक्टर महोदय जांच कर तत्काल जिला खनिज अधिकारी व खनिज इंस्पेक्टर्स पर कार्रवाई की जाए, दुबे ने कहा कि यदि एक सप्ताह के अंदर अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन पर रोक नहीं लगाई गई, तो इसकी शिकायत मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन एवं नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT)दिल्ली से की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में जनहित याचिका दायर कर उक्त अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की जाएगी, क्योंकि जिला खनिज अधिकारी पूरी तरह से अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाह हो चुका है, और ऐसे गैर जिम्मेदार अधिकारी को कोरबा में रहने का कोई अधिकार नहीं है, सैकड़ो प्रकरण अवैध रेत परिवहन के बने हैं, लेकिन उक्त अधिकारी संभवत: घुस लेकर मामले को यहीं पर रफा दफा कर देता है, जबकि कुछ प्रकरण को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल NGT भी भेजना चाहिए,जिले में अवैध उत्खनन के केस बिल्कुल ना के बराबर बनाए जा रहे हैं, जबकि नदी नालों में दिन-रात जेसीबी मशीन लगाकर रेत की खुदाई की जा रही है, जिला खनिज अधिकारी पूरी तरह से लापरवाह व गैर जिम्मेदार हो गया है, दुबे ने कहा कि रेत का अवैध उत्खनन एवं परिवहन रोकने की पूरी जवाबदारी जिला खनिज अधिकारी की होती है, लेकिन उक्त अधिकारी इस मामले में पूरी तरह से विफल हो गया है, क्योंकि बिना जिला खनिज अधिकारी कि मिलीं भगत से इतने बड़े पैमाने पर रेत की कालाबाजारी किसी भी कीमत पर संभव नहीं है, राजकुमार दुबे ने कहा कि कोरबा ब्लॉक के कुरमुरा नदी में तो पूरी नदी को ही रेत तस्करों ने पाट दिया है, नदी और नालों के बहाव को पूरी तरह से अवरोध कर दिया गया है, थाना और चौकिया के सामने से अवैध रेत लोड वाहन दिन-रात फराटे मारते हुए चल रहे हैं, शासन द्वारा लगाए गए सैकड़ो कैमरे में अवैध रेत परिवहन करते हुए वाहन रिकॉर्ड हो रहा है, लेकिन भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे जिम्मेदार अधिकारी को इससे कोई लेना देना नहीं है, दुबे जी ने कलेक्टर कोरबा से यह निवेदन भी किया कि एक बार आप स्वयं जिले में हो रहा है अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन की निगरानी कर ले पूरी स्थिति से रूबरू हो जाएंगे, जिले में कुछ रेत माफिया आपस में वर्चस्व की लड़ाई भी लड़ रहे हैं और वह दिन दूर नहीं जब एक बहुत बड़ी लड़ाई जिले में रेत तस्करों के द्वारा लड़ी जाएगी और जिले की स्थिति संभालने योग्य नहीं बचेगी, क्योंकि इसके पहले जिले में रेत के मामले में ही धारा 307 के तहत अपराध भी पंजीबद्ध हो चुका है, लेकिन जिला खनिज अधिकारी केवल अपनी जेब भरने में लगा हुआ है, राजकुमार दुबे ने अपने शिकायत पत्र में उल्लेख किया है कि मेरे शिकायत पत्र की एक – एक प्रति एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) एवं EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) छत्तीसगढ़ को भी भेजी जाए*ताकि जिले में अधिकारियों के संरक्षण में हो रहे भ्रष्टाचार पर निष्पक्ष: और पारदर्शी रूप से जांच व कार्यवाही हो सके,अब देखना होगा कि इस तरह के शिकायत पत्र और शिकायत पत्र के परिपेक्ष में समाचार प्रकाशन के बाद प्रशासन क्या रुख अख्तियार करता है*
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