टोल हटाने जिले वासियों का सामूहिक विरोध जरूरी, नहीं तो जनहित याचिका आखिरी उपाय… अधिवक्ता चितरंजय*
शक्ति जिला कलेक्ट्रेट मुख्यालय के ठीक सामने अवस्थित टोल बैरियर को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है…ताजा विवाद कलेक्टर के व्यवस्था एवं आदेश को ठेंगा दिखाते हुए टोल बैरियर संचालक के द्वारा क्राइस्ट पर्व के ठीक पहले दिन २४ दिसंबर को नहर रोड की खुदाई एवं खंभे गाड कर आवागमन को बाधित कर दी गई थी परंतु २५ दिसंबर को छुट्टी होने से लोगों को इसकी भनक २६ दिसंबर को तब लगी जब कलेक्ट्रेट मुख्यालय जा रहे लोगों की गाड़ियां वापस आने लगी इसी दरमियान वहां से गुजर रहे राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग (विधि) के प्रदेश अध्यक्ष एवं उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय सिंह ने ठीक १२.१८ बजे कलेक्टर अमृत विकास तोपनो को मोबाइल पर अवरोध की सूचना दी तब जिलाधीश ने इसके संबंध में अनभिज्ञता जाहिर करते हुए अवरोध तत्काल हटाने की बात कही। तदपश्चात कलेक्ट्रेट में कलेक्टर साहब की अनुपस्थिति में अपर कलेक्टर के एस पैंकरा को जानकारी देकर समुचित कार्यवाही हेतु आग्रह किया गया तब कलेक्टर साहब के आदेशानुसार अवरोध हटा दी गई।
अब यह यक्ष प्रश्न भविष्य में शक्ति जिले वासियों के लिए हमेशा बनी रहेगी कि टोल बैरियर संचालक की गुंडागर्दी के खिलाफ कब तक, और कौन आवाज उठाता रहेगा फिर हर किसी को हमारे कलेक्टर ऐसे ही हमेशा क्या उपलब्ध रह पाएंगे ?
फिर यह लगातार हर दिन की समस्या, कुछ महीनों में और सर चढ़ कर बोलेगी जब जिला न्यायालय, कलेक्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक, कंपोजिट बिल्डिंग, जिला चिकित्सालय के साथ जिला स्तरीय हर विभागीय कार्यालय के लिए जिले के निवासी इस अनुचित स्थान पर स्थापित बैरियर पर आकर लड़ते जूझते नजर आएंगे तब आगे चलकर यातायात व्यवस्था के लिए यह टोल नासूर से कम साबित नहीं होगा इसलिए हम सब प्रभावित जिले वासियों को इस घाव को नासूर बनने से रोकने के लिए एकजुट होकर सामूहिक पहल करना होगा जिसके पहले कदम के रूप में अधिवक्ता संघ ने टोल बैरियर को हटाने कलेक्टर को लिखित ज्ञापन भी दिया है। परंतु इस घाव को नासूर बनने से रोकने लिए जनमानस और प्रशासन को कदम से कदम मिलाकर प्रयास करना होगा, वरना आज की ही तरह भविष्य में भी टोल संचालक कलेक्ट्रेट के नाक के नीचे गैर कानूनी तरीके से आम सड़क की खुदाई और खंभा गाड़ कर लोगों का आवागमन बाधित करने का कुत्सित प्रयास करेगा। इस संबंध में अधिवक्ता चितरंजय सिंह ने बताया कि कई बार तथाकथित रूप से संरक्षण प्राप्त नासूर को ठीक करने के लिए प्रशासनिक इलाज कारगर नहीं होता बल्कि न्यायिक पहल की आवश्यकता होती है जैसे पूर्व में नगर के रेलवे क्रॉसिंग में दोनों ओर अवस्थित शराब दुकानों को हटाने उच्च न्यायालय में हमारे जनहित याचिका के माध्यम से आबकारी विभाग को मिली फटकार ही काम आई। अभी फिलहाल एक बार सभी नागरिक संगठनों का सामूहिक विरोध जरूरी है और बात नहीं बनने पर कानूनी लड़ाई के लिए अधिवक्ता तैयार हैं।
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