रायगढ़, 9 मार्च 2026/ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रायगढ़ जिले में महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से महिलाएं अब आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही हैं।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत कुल 9,679 आवास स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 2,076 आवास सीधे तौर पर महिलाओं के नाम पर स्वीकृत किए गए हैं, जिससे उन्हें अपने घर का मालिकाना हक मिला है। यह पहल महिलाओं को न केवल सामाजिक सम्मान दिला रही है, बल्कि उन्हें सुरक्षा और आत्मविश्वास का नया आधार भी प्रदान कर रही है। इसी प्रकार विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए संचालित पीएम जनमन योजना के अंतर्गत स्वीकृत 173 आवासों में से 85 आवास महिलाओं के नाम पर स्वीकृत किए गए हैं। इससे इन वर्गों की महिलाओं को भी सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनने का अवसर मिल रहा है।
मनरेगा योजना के अंतर्गत जिले में आजीविका को बढ़ावा देने के लिए 428 आजीविका डबरी स्वीकृत की गई हैं, जिनमें से 55 डबरी का निर्माण पूर्ण हो चुका है। प्रशासन की अभिनव पहल के तहत प्रत्येक डबरी से एक महिला को जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें आजीविका के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। इन डबरियों के माध्यम से महिलाएं सब्जी उत्पादन, मछली पालन और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों से जुड़कर अपनी आय में वृद्धि कर रही हैं। लगभग आठ माह तक पानी की उपलब्धता रहने से महिलाएं डबल फसल और सब्जी उत्पादन भी कर पा रही हैं।
पारदर्शिता और सम्मान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रत्येक डबरी के नागरिक सूचना पटल पर संबंधित महिला का नाम और लोकेशन आईडी अंकित की जा रही है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर यह पहल महिलाओं के लिए एक सच्चे सम्मान और पहचान का प्रतीक बन गई है। महिलाओं को हुनरमंद और आत्मनिर्भर बनाने के लिए जिले में प्रोजेक्ट उन्नति 2.0 के तहत व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। आरसेटी, कृषि विज्ञान केंद्र और डीडीयू-जीकेवाय के माध्यम से महिलाओं को राजमिस्त्री प्रशिक्षण सहित विभिन्न तकनीकी कौशलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
गौरतलब है कि इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी 55 प्रतिशत से अधिक है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद महिलाएं अब ब्रिक्स निर्माण और सेंटरिंग प्लेट जैसे क्षेत्रों में भी काम कर रही हैं, जो पारंपरिक रूप से पुरुषों के कार्य माने जाते थे। जिले में कई प्रेरक उदाहरण सामने आए हैं जहां महिलाओं ने स्वयं राजमिस्त्री बनकर अपना घर बनाया और अब वे निर्माण सामग्री तैयार कर बेचते हुए अपनी आय भी बढ़ा रही हैं। मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना के सफल एकीकरण ने महिलाओं को केवल योजनाओं के हितग्राही तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें उद्यमी बनने का अवसर दिया है।








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