सक्ती।
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किसानों के हित में लागू की गई धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता एक बार फिर कठघरे में खड़ी दिखाई दे रही है। भोथिया तहसील, जिला सक्ती अंतर्गत सलनी धान खरीदी मंडी में सामने आया ताज़ा मामला न केवल नियमों की अनदेखी का है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर मनमानी कैसे पूरे सिस्टम को खोखला कर रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम सलनी निवासी जीवन लाल चंद्रा पिता ननकामनी द्वारा 280 क्विंटल धान का टोकन कटवाया गया। जबकि शासन का स्पष्ट नियम है कि 100 क्विंटल से अधिक धान की बिक्री पर राजस्व विभाग/पटवारी द्वारा किसान के घर या खलिहान में भौतिक सत्यापन अनिवार्य है।
घर में धान नहीं, फिर 280 क्विंटल कैसे?
जांच में यह तथ्य सामने आया कि जीवन लाल चंद्रा के घर में धान का कोई भंडारण नहीं पाया गया, इसके बावजूद तौल की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। यह स्थिति व्यवस्था की गंभीर खामी या जानबूझकर की गई अनदेखी की ओर संकेत करती है।
कागज़ों में 13 एकड़, ज़मीन पर सच्चाई कुछ और
सूत्रों के अनुसार जीवन लाल चंद्रा के नाम लगभग 13 एकड़ भूमि पंजीकृत है, जबकि वह स्वयं खेती नहीं करता। भूमि का एक हिस्सा बटाई पर दिया गया है, जिसमें उपज आधी–आधी बंटती है। ऐसे में वह केवल आधी उपज का ही वैधानिक हकदार है।
इससे भी गंभीर तथ्य यह है कि पंजीकृत रकबे में से लगभग 8 एकड़ जमीन उसके वास्तविक कब्जे में ही नहीं है, जिसकी शिकायत अनुविभागीय अधिकारी सक्ती, तहसीलदार भोथिया, थाना जैजैपुर एवं कलेक्टर सक्ती को पूर्व वर्षों से की जा रही है।
मंडी में भौतिक सत्यापन: नियमों का खुला उल्लंघन
नियमों के विपरीत भौतिक सत्यापन किसान के घर के बजाय सीधे धान मंडी परिसर में किया गया, जो शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार अवैध है। इससे भौतिक सत्यापन की पूरी प्रक्रिया ही औपचारिकता बनकर रह गई है।
चेहरा देखकर सुविधा? गुणवत्ता जांच भी सवालों में
स्थानीय किसानों का आरोप है कि मंडी प्रभारी द्वारा चेहरा देखकर चुनिंदा किसानों को धान की बोरियाँ उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे वे अपने घर से धान भरकर सीधे मंडी में लाते हैं और बिना किसी गुणवत्ता जांच के तौल कराकर तुरंत “चट्टा” कर दिया जाता है।
न तो धान की नमी, न किस्म और न ही गुणवत्ता का कोई मानक परीक्षण किया जा रहा है। यह स्थिति शासन द्वारा निर्धारित गुणवत्ता नियंत्रण नियमों के खिलाफ है और धान खरीदी व्यवस्था में खुली मनमानी को दर्शाती है।
बाहरी धान और CCTV फुटेज
शासन द्वारा बाहरी धान की खरीदी पर स्पष्ट प्रतिबंध है, लेकिन आरोप है कि पिकअप वाहनों में भरकर बाहरी धान मंडी लाया गया। मंडी परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को इस मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया जा रहा है।
मंडी प्रबंधन की भूमिका संदेह के घेरे में
शिकायतकर्ता के अनुसार यह सब कुछ मंडी प्रभारी रमेश चंद्रा, मंडी अध्यक्ष गंगाधर चंद्रा एवं पटवारी टंडन मैडम (सलनी) की जानकारी में हो रहा है। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि संगठित अनियमितता की श्रेणी में आएगा।
ईमानदार किसानों के साथ अन्याय
ऐसी व्यवस्थागत मनमानी का खामियाजा ईमानदार किसानों को भुगतना पड़ता है। जिन किसानों का धान नियमों के कारण रोका जाता है, वहीं कुछ को विशेष सुविधा देकर बिना जांच तौल करा दी जाती है। इससे न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि शासन की नीति पर से किसानों का भरोसा भी कमजोर पड़ता है।
अब जवाबदेही तय होना जरूरी
यह पूरा मामला यह प्रश्न खड़ा करता है कि क्या धान खरीदी व्यवस्था केवल कागज़ों तक सीमित रह गई है? यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह अव्यवस्था और गहरी होगी।
प्रशासन से अपेक्षा है कि—
सीसीटीवी फुटेज की निष्पक्ष जांच
गुणवत्ता जांच प्रक्रिया की समीक्षा
भूमि कब्जा, पंजीयन व उपज का पुनः सत्यापन
संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय
दोष सिद्ध होने पर सख्त कार्रवाई
की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शासन की नीतियाँ केवल नाम मात्र की नहीं हैं।
आवेदक / शिकायतकर्ता
राजकुमार चंद्रा
पिता – गोरेलाल चंद्रा
ग्राम – सलनी, तहसील भोथिया
जिला – सक्ती (छत्तीसगढ़)
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