राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की पाठशाला में छात्र राजनीति से राष्ट्र प्रथम भाव से प्रेरित एक विद्यार्थी को पुनः आखिरकार आज भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वीकार कर उसकी ताज पोशी की गई… इन पलों में विद्यार्थी परिषद से ही राजनीति के शिखर पर पहुंचने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नितिन नवीन आज से मेरे बॉस हैं यह बात इंगित करता है कि भविष्य में सत्ता पर संगठन सर्वोपरि होगी।
निश्चित रूप अनेकों विरोधाभास… विसंगतियों और बाधाओं के बावजूद नरेंद्र मोदी और अमित शाह की सशक्त जोड़ी ने संघ शक्ति से अपनी बात मनवा ही लिया कि विद्यार्थी परिषद के पाठशाला का विद्यार्थी नितिन नवीन संघ के आदर्शों और नीतियों को बचपन से ही भलीभांति जानता और समझता है…और शायद! इसलिए अंततः संघ ने भी सबसे कम आयु के इस युवा नितिन पर भरोसा जताते हुए सबसे बडे प्रजातंत्र के सबसे बड़े राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर सबसे कम आयु का नितिन नवीन को आसीन कराने में अपनी सहमति जाहिर किया। जिसे भारतीय जनता पार्टी अपने अद्भुत संगठन पर्व के रूप सेलिब्रेट कर रहा है…करना भी चाहिए कि क्योंकि राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए सहमति बनाने संघ और सत्ता के बीच करीब दो साल की भारी मशक्कत हुई… और इस बीच निवृतमान अध्यक्ष जे पी का यह कहना कि अब BJP को संघ की आवश्यकता नहीं है, संघ को नागवार गुजरा…और तब से संघ ने अपने कई नाम सामने किए, तो वहीं मोदी_अमित ने अपने नाम सामने लाए पर सहमति नहीं बन पाई और अद्भुत संगठन पर्व करीब दो साल टलता रहा… तब निश्चित रुप से जिम्मेदारी संभाल रहे धुरंधरों का खुश होना लाजिमी है।
अब वक्त यह जानने का है कि नितिन नवीन के ताजपोशी का छत्तीसगढ़ की राजनीति पर क्या असर होगा? इस पर मोटे तौर पर हर व्यक्ति यही कह रहा है कि छत्तीसगढ़ में विशेष कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है क्योंकि विगत वर्षों में राज्य की बागडोर नितिन के हाथों रही है और उनके लोग ही सत्ता और संगठन पर काबिज हैं… पर हमारी नजर कुछ और देख रही है, क्योंकि नितिन पहले हाई कमांड के प्रतिनिधि नवीन थे पर अब स्वयं हाई कमांड हैं, जो जाने_अनजाने अपने मती के विपरीत असहमति से भी लिए गए निर्णय में शामिल रहे हैं जिन्हें सुधारने स्वविवेक का इस्तेमाल करने अब सक्षम है।फिर! इंसान की मनोवृत्ति होती है कि मजबूरी में लिए निर्णय सक्षमता की स्थिति में सुधार दिया जाए। इसलिए छत्तीसगढ़ में भी नए साल पर चौंकाने वाले निर्णय आ सकते हैं क्योंकि यह भी साफ दिख रहा है कि राज्य में सब कुछ अच्छा नहीं चल रहा है…और यहां पर धान खरीदी पर्व के साथ सभी सरकारी पर्व पर भ्रष्टाचार चरम सीमा पर होने से पार्टी के सिपाही किंकर्तव्य विमूढ़ होकर राजनीतिक कोमा में जाने की स्थिति में हैं तो वहीं आम जनता दुखी होकर बात_बात पर भूपेश को याद कर रही है…इसलिए नए साल में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष से नई आस जगी है कि लोकसभा चुनाव के पूर्व खुली भर्ती में प्रवेश लिए लोगों के पार्टी मंच पर बुलंद हौसले के पीछे जनसंघियों के हित कुचले जा रहे हैं इसलिए उम्मीद है कि पार्टी के रीढ़ इन जनसंघियों के दर्द पर कुछ मरहम लगेगा… अन्यथा जब जब कार्यकर्ता घर बैठ गया है तब सरकार की भी घर वापसी हो गई है क्योंकि जनसंघी पार्टी के खिलाफ जाने की हिमाकत नहीं करता है, पर अपने दुख को सहन करने एकांत का सहारा लेता है। आशा है, नितिन नवीन के अगुवाई में ट्रिपल इंजन की सरकार जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी के सफर में बिना ट्रेन बदले साथ रहे लोगों के हितों को लेकर कारगार कदम उठाएगी…जय श्री राम वंदे मातरम्।
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