प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा गुरु गोबिंद सिंह जी के दो छोटे साहिबज़ादों, बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह, के सर्वोच्च बलिदान को सम्मान देने और उनकी वीरता को स्मरण दिलाने उनके शहादत दिवस २६ दिसंबर को बाल वीर दिवस घोषित किया गया जो अल्पायु में धर्म और सच्चाई के लिए शहीद हो गए और मुगल शासकों के सामने झुकने के बजाय धर्म और राष्ट्र के लिए बलिदान हो गए, यह बात बताते हुए अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद शक्ति जिलाध्यक्ष एवं उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय सिंह ने कहा कि यह दिन राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है जो हमारे नौनिहालों को साहस व देश प्रेम का संदेश देता है। उन्होंने आगे बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा गत वर्ष बालवीर दिवस का भव्य आयोजन जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के सायुज्य में किया गया था परंतु आज इस आयोजन को लेकर शासन प्रशासन की उदासीनता समझ से परे है। क्योंकि राजनीतिक हस्तियों को लेकर आयोजन जिस भव्यता के साथ किया जाता है पर धर्म और राष्ट्र के लिए प्राण न्योछावर करने वालों के लिए दूजाभाव उचित नहीं है तथा राष्ट्रीय स्वाभिमान जागरण के प्रतिकूल है।
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