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पद्मश्री डॉ. दामोदर गणेश बापट यद्यपि पद्मश्री प्राप्त व्यक्ति हैं,
वे लोकप्रसिद्ध नहीं हैं,बहुत कम लोग उनके नाम को जानते हैं l उनको जानने वालों में भी उनको समझनेवाले बहुत ही कम हैं l इसका कारण लोगों का अज्ञान अथवा उनकी आकलन शक्ति का कम होना नहीं है, उसका कारण उनका स्वयं का आत्म विलोपी स्वभाव है l
जीवनभर पूर्ण समर्पण की कठोर साधना निरपवाद सभी के प्रति निश्छल व निःस्पृह आत्मीयता तथा हृदय की समूची करुणा उंडेलकर सतत सेवा में रति ये उनके जीवन के असाधारण वैशिष्ठ्य थे l
परन्तु सामान्य दृष्टि से ऊपर से दिखने के लिए वे किसी अनपढ़ मजदूर या किसान जैसे लगते थे l स्वामी विवेकानंद जी ने कहा है कि ‘ हमारे कृष्ण, बुद्ध या ईसा से अधिक ऊंचाई व गहराई रखने वाले आध्यात्मिक व्यक्तित्व इस दुनिया में आते हैं, अपना कार्य करके चुपचाप चले जाते हैं, दुनिया को पता भी नहीं चलता l
मैं स्वयं स्वर्गीय दामोदर बापट जी को उस श्रेणी की आत्मा मानता हूँ l उनका स्मरण ही हृदय को पवित्रता से भर देता है l उनके व्यक्तित्व, कृतित्व आदि का वर्णन शब्दों में कर पाना दुर्धर कार्य है l
-प.पू. सरसंघचालक मा. मोहन भागवत जी

समाज सेवी बापट जी की मनाई गई पुण्यतिथि
जांजगीर चांपा। स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय चांपा में स्वर्गीय समास सेवी पद्मश्री डॉक्टर दामोदर गणेश बापट जी की छठवीं पुण्यतिथि मनाई गई जिसमें स्थानीय नेताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिए। इस मौके पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामप्रकाश केशरवानी सहकार भारती प्रदेश कोषाध्यक्ष ने कहा कि स्वर्गीय दामोदर गणेश दास जी बापट ने कुष्ठ रोगियों के बीच रहकर केवल समाज सेवा का कार्य ही नहीं किए हैं बल्कि उनके बीच रहकर उन्हें रोजगार से भी जोड़ने का काम किए हैं उन्होंने आरएसएस में रहकर पार्टी गतिविधियों को ही आगे नहीं बढ़ाया अपितु उन्होंने अपने घर परिवार एवं समस्त कारोबार को छोड़कर दीन दुखियों के बीच में रहना उचित समझा । जिसके कारण इन कुष्ठ रोगियों के मनोबल में इजाफा हो सका और स्व बापट जी का जीवन भी समाज सेवा में ही निकल गया । ऐसे महापुरुष को हमेशा याद करते रहना चाहिए तथा उनके जीवन में किए गए कार्यों के को अनुसरण करने की आवश्यकता है
कार्यक्रम के अध्यक्ष कर रहे नगर पालिका अध्यक्ष प्रदीप नामदेव ने कहा कि जिस व्यक्ति के जीवन में कुष्ठ रोग जैसी बीमारी हो जाने से उनके घर वाले जिनको छोड़ देते हैं ऐसे लोगों की सेवा करने के लिए बापट जी ने आगे आकर उनका हाथ थामा और पूरा जीवन उनके बीच रहकर उनकी सेवा की है। स्व बापट जैसे लोग इस दुनिया में विरले होते हैं जो दूसरों की पीड़ा को समझ कर सेवा भाव से आगे जाकर कार्य करते हैं
इस अवसर पर सरस्वती शिशु मंदिर के प्राचार्य अश्वनी कश्यप ने कहा कि बापट का जीवन हम सबके लिए प्रेरणादाई है जिन्होंने जीवन में केवल समाज सेवा को ही प्रमुख कार्य के रूप में चुना था। कार्यक्रम के शुभारंभ में स्वर्गीय बापट जी के चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि की गई तथा दीप प्रज्वलित कर उन्हें नमन किया गया। इस अवसर पर गोविंद मिश्रा, ललित देवांगन, प्रमोद देवांगन, ओमप्रकाश केसरवानी, संजय देवांगन, प्रांशु केसरवानी,कान्हा केशरवानी , मीडिया प्रभारी रमेश महंत एवं अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे








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